Curacao bahsegel bonus eGaming lisansı, gibi markalara uluslararası güven sağlar.

Rulet masalarındaki krupiyeler, bahsegel giriş tarafından düzenli olarak eğitilir ve lisanslıdır.

Kazanç elde etmek için fırsatlarla dolu kampanyalar düzenleyen pinco kullanıcılarını ödüllendirir.

नानू जी: सेवा, शिक्षा और समर्पण की जीवंत मिसाल
Sewa Bharti Logo

नानू जी: सेवा, शिक्षा और समर्पण की जीवंत मिसाल — माननीय मनसा राम जी

गाँव: भ्रमली, उपमंडल: घुमारवीं, जिला: बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश

माननीय मनसा राम जी

“जिनके मन में समाज के लिए कुछ करने का जज़्बा होता है, उनके लिए उम्र कभी रुकावट नहीं बनती।”

यह पंक्ति यदि किसी पर सटीक बैठती है तो वह हैं – माननीय मनसा राम जी, जिन्हें पूरा प्रदेश ‘नानू जी’ के नाम से जानता है।


शिक्षक से समाज सेवक बनने की प्रेरणादायक यात्रा

मनसा राम जी, बिलासपुर जिले के घुमारवीं उपमंडल के भ्रमली गांव के निवासी हैं। उन्होंने राज्य सरकार के शिक्षा विभाग में बतौर शिक्षक 58 वर्ष की आयु तक सेवा दी। अपने शिक्षण काल में उन्होंने न सिर्फ शिक्षा दी, बल्कि समाज में बदलाव की नींव भी रखी:

  • राजकीय प्राथमिक पाठशाला सिकरोहा में सेवा करते समय उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल लाने का प्रयास किया।
  • उस समय लड़कियों की शिक्षा को समाज स्वीकार नहीं करता था, पर उन्होंने पहली बार अपने स्कूल में लड़कियों का दाखिला करवाया।
  • साथ ही बच्चों को जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर सोचने और जीने की प्रेरणा दी।

आज भी गाँव में लोग उन्हें सम्मानपूर्वक "मास्टर जी" कहकर बुलाते हैं।

एक कार्यक्रम में मनसा राम जी

सेवानिवृत्ति के बाद शुरू हुआ असली ‘सेवा जीवन’

सेवानिवृत्त होने के बाद मनसा राम जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा प्रकल्प ‘सेवा भारती’ से स्वयं को पूर्णतः जोड़ लिया। उनका ध्येय था — पिछड़े और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा से जोड़ना

"जहाँ किताबें नहीं पहुँचतीं, वहाँ मनसा राम जी पहुँच जाते थे।"

वे प्रदेश के दूरस्थ गाँवों और दुर्गम इलाकों में जाकर न सिर्फ बच्चों को ढूंढते थे, बल्कि उनके माता-पिता को भी प्रेरित करते कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजें।


बचपन को नशे से निकाल, शिक्षा से जोड़ा

मनसा राम जी के प्रयासों के कुछ प्रेरणादायक उदाहरण:

  • 2008 में कुल्लू के मलाणा क्षेत्र से वे 12 बच्चों को डगशाई स्थित छात्रावास में लेकर आए। वहाँ बच्चे चरस इकट्ठा कर बेचने के काम में लगाए जाते थे। कई दिन मलाणा में रुककर उन्होंने माता-पिता को समझाया और बच्चों को पढ़ने भेजा।
  • चंबा जिले के सलूणी व तीसा क्षेत्र से भी कई बच्चों को उन्होंने शिक्षा के लिए छात्रावास में लाकर नई दिशा दी।
  • मंडी के बरोट क्षेत्र से एक बच्चे को छात्रावास में पढ़ाया, जो आज पीएचडी कर रहा है।
  • रामपुर के लूरी क्षेत्र से लाए गए एक और बच्चे ने LLB की पढ़ाई पूरी की।
Hostel ke bacho ke sath
"बच्चे पढ़ें, समाज बदले — यही सच्ची सेवा है।"

सेवा भारती को हिमाचल में आकार देने वाले शिल्पकार

आज हिमाचल प्रदेश में सेवा भारती की जो व्यापक उपस्थिति है, उसके पीछे मनसा राम जी का दूरदृष्टि और समर्पण है। वे:

  • मंडी, कुल्लू, डगशाई जैसे अनेकों क्षेत्रों में सेवा प्रकल्पों की स्थापना में अग्रणी रहे।
  • दान-संग्रह, जनसंपर्क, और संगठनों से समन्वय जैसे कार्यों को अकेले संभालते रहे।
  • पूरे प्रदेश में घूमकर सेवा भारती को एक सशक्त संस्था में बदलने का श्रेय उन्हें जाता है।

नानू जी — नाम नहीं, भावना है

आज प्रदेशभर में बच्चे और युवा उन्हें ‘नानू जी’ कहकर पुकारते हैं। यह नाम उनके उम्र से नहीं, बल्कि उनके स्नेह, मार्गदर्शन और आत्मीयता से उपजा है।

"पद हो या न हो, मनसा राम जी की इज्जत और प्रभाव हर कार्यकर्ता के दिल में है।"

80 वर्ष की आयु में भी सेवा की लौ

2024 में मनसा राम जी ने अपना 80वां जन्मदिन मनाया, लेकिन सेवा के प्रति उनका जोश आज भी उतना ही प्रखर है। वे अब भी अपने संपर्कों से बच्चों को जोड़ते हैं, अभिभावकों को समझाते हैं और शिक्षा को घर-घर पहुँचाने के लिए प्रयासरत हैं।


नमन उस दीप को जो बुझा नहीं

माननीय मनसा राम जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि—

"सेवा और शिक्षा ही सच्चा राष्ट्र निर्माण है।"

वे न तो सिर्फ शिक्षक थे, न ही केवल सेवाव्रती — वे एक युगद्रष्टा हैं जिन्होंने हिमाचल के गाँवों में नई सोच और नए सपनों की अलख जगाई